ग्रीन टी के फायदे (Benefits of Green Tea In Hindi)

ग्रीन टी (Green Tea):-

ग्रीन टी कई आम स्वास्थ्य के मुद्दों से राहत प्रदान करती है और कई पुराने रोगों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम करती है। अपने कई स्वास्थ्य लाभों के कारण, ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए चमत्कार कर सकती है। सिर्फ तीन से चार कप ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी हो सकती है। आइए जानते हैं ग्रीन टी कई आम स्वास्थ्य के मुद्दों से राहत प्रदान करती है और कई पुराने रोगों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम करती है। अपने कई स्वास्थ्य लाभों के कारण, ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए चमत्कार कर सकती है। सिर्फ तीन से चार कप ग्रीन टी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी हो सकती है। आइए जानते हैं

  1. ग्रीन टी के फायदे दिमाग के लिए
  2. हरी चाय का लाभ बालों के नुकसान को रोकने के लिए
  3. हरी चाय स्वस्थ दातों के लिए
  4. ग्रीन टी का लाभ वज़न कम करने के लिए
  5. ग्रीन टी के मधुमेह के लिए लाभ
  6. हरी चाय कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए
  7. उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू उपचार है ग्रीन टी
  8. ग्रीन टी उम्र बढ़ने को रोकने के लिए
  9. कैंसर का अचूक इलाज है ग्रीन टी
  10. हरी चाय मज़बूत हड्डियों के लिए
  • ग्रीन टी के फायदे दिमाग के लिए (Benefits of Green Tea for the Mind)

हमारे दिमाग को ठीक ढंग से काम करने के लिए स्वस्थ रक्त वाहिकाओं की जरूरत होती है। एक स्विस अध्ययन के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से हरी चाय पीते हैं, उनके दिमाग के कार्य करने वाले स्मृति क्षेत्र में अधिक गतिविधि होती है। हरी चाय में मौजूद बायोएक्टिव यौगिकों के कारण न्यूरॉन्स पर सुरक्षात्मक प्रभाव हो सकता है जिससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की वजह से होने वाली क्षति में देरी हो सकती है। अपनी स्मृति को बढ़ावा देने और रोग को दूर करने के लिए बस दैनिक हरी चाय के एक या दो कप पिएं।

  • ग्रीन टी का लाभ बालों के नुकसान को रोकने के लिए (Advantages of green tea to prevent hair loss)

हरी चाय एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant) से युक्त है जो बालों के नुकसान को रोकने और बालों के फिर से वृद्धि होने को बढ़ावा देते हैं। हरी चाय के कुछ कप हर दिन पीने से आपके बाल झड़ने कम होंगे और फिर से बढ़ेंगे। इसके अलावा, अपने गीले बालों पर ताज़ा बनी ग्रीन टी लगाकर दस मिनट के बाद धोने पर रूसी और सूखे सिर जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी। यह कम से कम कुछ महीनों के लिए कई बार एक हफ्ते में करे।

  • ग्रीन टी स्वस्थ दातों के लिए ( Green tea for healthy teeth )

हरी चाय पीने से दात स्वस्थ होते हैं और गुहाओं (cavities) का जोखिम कम होता है। हरी चाय में प्राकृतिक फ्लोराइड (fluoride), पॉलिफेनोल्स (polyphenols) और कटेचिंस (catechins) प्रभावी ढंग से बैक्टीरिया को मार सकते हैं जिनके कारण दंत क्षय, बुरी सांस, गुहा जैसे विभिन्न प्रकार के रोग होते हैं।यूरोपीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एक दिन में एक या एक से अधिक कप हरी चाय पीने से दंत नुकसान कम हो जाता है। हालांकि, हरी चाय के मौखिक लाभ चीनी, शहद या अन्य मिठास जुड़ जाने से कम हो जाते हैं।

  • ग्रीन टी का लाभ वज़न कम करने के लिए (Benefits of Green Tea To Lose Weight)

कई अध्ययनों ने साबित किया है कि दैनिक ग्रीन टी का एक कप शरीर में वसा को कम कर सकता है, विशेष रूप से पेट के क्षेत्र में। यह शरीर में वसा प्रतिशत, शरीर का वज़न और कमर की परिधि में कमी कर सकता है। इसके अलावा, ग्रीन टी में विधवान कटेचिंस शरीर में गर्मी उत्पन्न करते हैं, जो बदले में अतिरिक्त कैलोरी जलाने में मदद करते हैं। चाय में कैफीन (caffeine) और अन्य यौगिकों (compounds) के संयोजन से चयापचय को भी बढ़ावा मिलता है और वसा जल्दी नष्ट होता है।

  • ग्रीन टी के मधुमेह के लिए लाभ (Benefits of Green Tea Diabetes)

ग्रीन टी मधुमेह (diabetes) से पीड़ित लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। ग्रीन टी में मौजूद पॉलिफैनोल्स और पोलिसच्चराइड्स (polysaccharides) जैसे यौगिक मधुमेह के दोनों प्रकार के लिए उपयोगी हो सकते हैं। ग्रीन टी अग्न्याशय में इंसुलिन (Insulin) के उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकती है, रक्त शर्करा के स्तर को विनियमित कर सकती है और टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों में ग्लूकोज को अवशोषित कर सकती है। टाइप 2 मधुमेह में, लगातार हो रही रक्त शर्करा में वृद्धि के कारण अकसर आंखों, दिल और गुर्दे में जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। ग्रीन टी इस वृद्धि को रोकती है। वास्तव में, ग्रीन टी सबसे अच्छी चीजों में से है जो एक मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को अपने आहार में शामिल करनी चाहिए।

  • ग्रीन टी कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए  (To reduce green tea cholesterol)

हरी चाय प्रभावी रूप से रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। साथ ही खराब कोलेस्ट्रॉल और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के अनुपात में सुधार करती है। कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर हरी चाय पीने के प्रभाव के बारे में अध्ययनों से पता चलता है कि यह कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल यानि “बुरा” कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है। साथ ही यह उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (HDL) यानि “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। इसके अलावा, हरी चाय धमनियों को साफ रखती है ताकि पट्टिका, दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का खतरा कम होता है।

  • उच्च रक्तचाप के लिए घरेलू उपचार है ग्रीन टी (Home remedies for high blood pressure are green tea)

ग्रीन टी के नियमित सेवन से हाई बीपी के खतरे को कम किया जा सकता है।वास्तव में, आंतरिक चिकित्सा के अभिलेखागार में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जो लोग डेढ़ से ढाई कप ग्रीन टी का सेवन लगभग एक वर्ष तक नियमित रूप में करते रहे, वे उच्च रक्तचाप के खतरे से ग्रीन टी का कोई सेवन न करने वाले लोगों की अपेक्षा 46% कम प्रभावित होते हैं।

  • ग्रीन टी उम्र बढ़ने को रोकने के लिए (Green tea to prevent aging)

ग्रीन टी में उपलब्ध एंटीऑक्सीडेंट हानिकारक मुक्त कणों से त्वचा की रक्षा करते हैं। ये दीर्घायु को बढ़ावा दे कर त्वचा के रोगों का इलाज करते हैं। साथ ही, उम्र बढ़ने के विभिन्न संकेतों के खिलाफ लड़ाई में मदद करते हैं। यही कारण है कि ग्रीन टी कई सौंदर्य उत्पादों में इस्तेमाल की जाती है। अध्ययन में देखा गया है कि ग्रीन टी सूर्य की क्षति को भी कम कर सकती है।

  •  कैंसर का अचूक इलाज है ग्रीन टी (The perfect remedy for cancer is green tea)

कई अध्ययनों में देखा गया है कि हरी चाय में शामिल एंटीऑक्सीडेंट विभिन्न प्रकार के कैंसर के जोखिमों को कम कर सकते हैं जैसे स्तन, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, अग्नाशय, मूत्राशय, फेफड़े और पेट का कैंसर।

 सलाद खाने के फायदे और नुकशान (Benefits and disadvantages of eating salad in hindi)

सलाद(Salad)

सलाद हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसलिए अधिकतर घरों में खाने के साथ इसका सेवन किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सलाद का सेवन करना सेहत के लिए भी लाभकारी होता है। सलाद में कई प्रकार की हरी सब्जियां और फल का उपयोग किया जाता है जो हमें कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं। इसलिए सलाद भोजन का एक बहुत ही जरूरी भाग होता है।

सलाद खाने के फायदे (Benefits of eating salad)

  • सलाद खाने के फायदे आँखों के लिए (Benefits of eating salad for eyes)

सलाद का सेवन आपकी दृष्टि को तेज करने में मदद कर सकता है। पालक, लाल लेटुस और कुछ अन्य सब्जियां, विटामिन ए कैरोटीनॉइड, ज़ेक्सैंटीन और ल्यूटिन से भरी हुई होती है। ये पोषक तत्व आपके शरीर को उच्च ऊर्जा के प्रकाश के विरुद्ध रोकने में सहायता करते हैं जिसके कारण आंखों की क्षति हो सकती है। सुनिश्चित करें कि आप इसे अपने दैनिक भोजन में जोड़ लें यदि आप जीवन भर चश्मा पहनाना नहीं चाहते हैं।

  • सलाद खाने के लाभ करें अनिद्रा को दूर (Make Benefits of Salad Eat Insomnia)

खैर, शोध से पता चलता है कि यदि आप नियमित आधार पर सलाद खाते हैं, तो यह न केवल आपको स्वस्थ रखता है बल्कि अनिद्रा को भी दूर करता है। लेटस में ‘लिक्टोकारियम’ नामक नींद पैदा करने वाले पदार्थ होता है, जिसका उपयोग अनिद्रा के इलाज में किया जाता है। इसलिए अपने दैनिक आहार में सलाद के सेवन को जारी रखें।

  • सलाद के फायदे फाइबर के लिए (Benefits of Salad for Fiber)

आपके शरीर को बहुत अधिक फाइबर की जरूरत होती है। स्वस्थ आहार खाने से शरीर को ऊर्जावान महसूस करने में मदद मिलती है। सलाद आपके आहार में फाइबर को जोड़ने में मदद करते हैं जिससे कोलेस्ट्रॉल और कब्ज काफी हद तक कम हो जाती है। भोजन करने से पहले उच्च फाइबर सलाद का सेवन, उच्च कैलोरी खाने में आपकी मदद करता है। अपने आहार में सब्जियों की मात्रा बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है, रोज़ाना कई तरह के सलाद का सेवन करना। यदि आप बहुत सारी कच्ची सब्जियां खाते हैं, तो आप उन में मौजूद एंजाइमों से लाभ प्राप्त हो सकते हैं। ये एंजाइम भोजन में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए आपके शरीर की सहायता करते हैं।

  • सलाद का सेवन रखें पाचन को स्वस्थ (Keep the salad intake healthy)

जब भी आप भारी भोजन का सेवन करते हैं, तो आपको पेट भरा हुआ महसूस होता है जिसके कारण अक्सर ब्लोटिंग (पेट फूलना) हो जाती है। सलाद के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह ब्लोटिंग का कारण नहीं होता है। सलाद निश्चित रूप से आपके पेट को भरा हुआ रखने में मदद करता है। लेकिन इसके सेवन से आप आलसी महसूस नहीं करते हैं जैसे आप अक्सर हर भोजन के सेवन के बाद आप करते हैं।

  • सलाद से पाएं वजन कम करने में मदद (Get Salad Help in Weight Loss)

यदि आप कमर को पतला बनाने का तरीका तलाश रहे हैं, तो आपको हर दिन सलाद खाना चाहिए। सलाद कैलोरी में बहुत कम होते हैं और इसमें बहुत अधिक पोषक तत्व होते हैं। तो आप आसानी से सभी वसायुक्त खाद्य पदार्थों की जगह इसका सेवन कर सकते हैं। इसके बाद आप बस कुछ ही हफ्तों में अंतर देखेंगे। 

  • मसल्स बनाने के लिए करे सलाद का उपयोग (Use of salad to make mussels)

हरे सलाद और पालक में नाइट्रेट होते हैं जो मांसपेशियों में प्रोटीन बनने को बढ़ाने में मददगार होते हैं। प्रोटीन आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और अधिक कुशल बनाता है। इसलिए मांसपेशियों के लिए आपको निश्चित रूप से आपके भोजन में हरे सलाद को जोड़ने की आवश्यकता है।

सलाद खाने के नुकसान (Salad eating disadvantages)

  • सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। अगर इन सब्जियों को सेवन से पहले अच्छे से धोया जाएँ तो ये कीटनाशक रसायन सलाद के साथ शरीर में पहुंच कर विषैला प्रभाव डालते हैं जिनसे कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं।
  • छोटे बच्चो को अधिक मात्रा में टमाटर और खीरे का सलाद नहीं देना चाहिए।
  • कुछ लोगों को विशेष प्रकार की सब्जियों से एलर्जी हो सकती है। इसलिए ऐसे में उन लोगों को बाहर सलाद के सेवन से पहले इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वो किन सब्जियों से बने सलाद का सेवन कर रहें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान सलाद के सेवन को लेकर अपने डॉक्टर से जरूर सलाह करें।

गिलोय के विशेष स्वास्थ्यकारी फ़ायदेऔर नुकसान(Gilo’s Special Health Benefits and Disadvantages in hindi)

गिलोय (Giloy)

पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचे। इलाज के रूप में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।  पिछले दिनों जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचे। इलाज के रूप में गिलोय का नाम खासा चर्चा में आया। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।  गिलोय एक बहुवर्षिय लता होती है| इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं| आयुर्वेद में इसके कई नाम उल्लेख है जैसे अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी| आयुर्वेद में इसे बुखार की विशेष औषधि माना गया है इसलिए इसे जीवन्तिका नाम दिया गया है| गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर दिखती है| नीम, आम्र के पेड़ के आस-पास भी यह मिलती है| जिस पेड़ को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं| इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय सबसे अच्छी औषधि मानी जाती है| स्वाद में यह तीखी होती है, पर गंध कुछ विशेष नहीं होती| पहचान के लिए इसके क्वाथ में जब आयोडीन का घोल डाला जाता है तो यह गहरा नीला रंग हो जाता है| यह इसमें स्टार्च की उपस्थिति के कारण होता है| गिलोय सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं। इसे खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

  • गिलोय के कुछ विशेष स्वास्थ्यकारी फ़ायदे (Some special health benefits of Giloy)
  1. शरीर में खून की कमी को दूर करें
  2. पीलिया(jaundice) को ठीक करने में हैं फायदेमंद
  3. शरीर में जलन की समस्या दूर करें
  4. पेट की कई तरह के रोगों में लाभकारी
  5. आंखों के लिए फायदेमंद है गिलोय रस
  6. बुखार के लिए सबसे असरदार है गिलोय
  7. खुजली दूर भगाएं गिलोय
  8. श्वास सम्बन्धी समस्या को कम करे गिलोय

 

  • भारतीय भाषाओं में गिलोय के नाम (Giloy’s names in Indian languages)
  • हिंदी – गिलोय, गुलांचा
  • संस्कृत – अमृता, गुडुची, अमृतवल्ली, अमृतवल्लरी,
  • पंजाबी – बटिंडू, गरहम, गरूम
  • मराठी – गिलोय
  • बंगाली – गुलांचा
  • गुजरती – गिलया
  • कन्नड़ – गिलोय
  • तेलुगु – टिप्पा टीगा
  • गिलोय के नुकसान (Damage to Giloy)

यदि आप मधुमेह की दवाई ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस जड़ी बूटी का सेवन नहीं करना चाहिए। गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसके इस्तेमाल के लिए अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

नीम के चमत्कारिक गुण और दुष्प्रभाव ( neem’s miraculous properties and side effects)

नीम

नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा।  इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा। आयुर्वेद से जुड़े लोग नीम को अमृत के समान बताते हैं।

नीम के चमत्कारिक गुण (Neem’s miraculous properties)

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। नीम एक ऐसा पेड़ है जो सबसे ज्यादा कड़वा होता है परंतु अपने गुणों के कारण आयुर्वेद व चिकित्सा जगत में इसका अहम स्थान है। नीम रक्त साफ करता है। दाद, खाज, सफेद दाग और ब्लडप्रेशर में नीम की पत्ती लेना लाभदायक होता है।
नीम कीड़ों को मारता है। इसलिए इसकी पत्तों को कपड़ों व अनाज में रखा जाता है। नीम की 10 पत्ते रोज खाने से रक्तदोष खत्म हो जाता है। नीम के पंचांग, जड़, छाल, टहनियां, फूल पत्ते और निंबोली बेहद उपयोगी हैं। नीम आंख, कान, गला और चेहरे के लिए उपयोगी है। आंखों में मोतियाबिंद और रतौंधी हो जाने पर नीम के तेल को सलाई से आंखों में डालने से काफी लाभ होता है। नीम के पत्ते को पीसकर अगर दाईं आंख में सूजन है तो बाएं पैर के अंगूठे पर लेप लगाएं। सूजन अगर बनाईं आंख में हो तो दाएं अंगूठे पर लेप करें। आंखों की लाली और सूजन ठीक हो जाती है।कान में दर्द या फोड़ा फुंसी हो गई हो तो नीम या निंबोली को पीसकर उसका रस कानों में टपकाए। कान में कीड़ा गया हो तो नीम की पत्तियों का रस गुनगुना कर इसमें चुटकी भर नमक टालकर कान में टपकाकर, कीड़ा मर जाएगा।अगर कान से पीप आ रहा है तो नीम के तेल में शहद मिलाकर कान साफ करें, पीप आना बंद हो जाएगा। सर्दी जुकाम हो गया हो तो नीम की पत्तियां शहद मिलाकर चाटें। खराश तुरंत ठीक हो जाएगी।

  • नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म रोगों और घावों के निवारण में सहायक है।
  • नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
  • नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और कांतिवान होती है। हां पत्तियां अवश्य कड़वी होती हैं, लेकिन कुछ पाने के लिये कुछ तो खोना पड़ता है मसलन स्वाद।
  • नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं और ये खासतौर सेचेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।
  • नींबोली (नीम का छोटा सा फल) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है।
  • नीम के द्वारा बनाया गया लेप बालो में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।
  • नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी में लाभ मिलता है(नेत्रशोथ या कंजेक्टिवाइटिस)
  • नीम की पत्तियों के रस औरशहद को २:१ के अनुपात में पीने से पीलिया में फायदा होता है और इसको कान में डालने से कान के विकारों में भी फायदा होता है।
  • नीम के तेल की 5-10 बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फायदा होता है।
  • नीम के बीजों के चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है।

नीम से दुष्प्रभाव (Neem’s side effects)

  • नीम को छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें क्योंकि नीम के सेवन से छोटे बच्चों में किडनी और लीवर की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • चूंकि नीम का प्रयोग दर्द निवारक के रूप में किया जाता है इसलिए नीम का सेवन सही मात्रा और सही तरीके से करें अन्यथा आपको थकान और सुस्ती भी हो सकती है।
  • डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए नीम के तेल के सेवन की सलाह दी जाती है लेकिन अधिक मात्रा में इस तेल का सेवन करने से मरीज को शरीर में सुन्नता का भी अनुभव हो सकता है और वह कोमा में जा सकता है।
  • कई बार नीम का अधिक सेवन करने से पेट में जलन भी हो सकती है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखें।
  • नीम में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है। अधिक मात्रा में नीम का सेवन करने से किडनी और लीवर सहित शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।

साइनस के लक्षण, कारण, इलाज पे क्या है हमारे विशेषज्ञ की राय(Know the expert,causes of sinus, symptoms and treatment)

तेज और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग खुद पर ध्यान देने में इतना वक्त नहीं लगाते जितना वो टेंशन और स्ट्रेस में गुजारते हैं   । जिसके कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और इसका सीधा असर उनकी हेल्थ पर  पड़ता हैं साथ -साथ कई बीमारियों का शिकार होते हैं उन्ही मैं से एक साइनस हैं ।

साइनस क्या हैं और कैसे होता हैं (What is sinus and how it happens) :-

साइनस नाक में होने वाला एक रोग है । इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। जो व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है उसे ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है। कुछ लोगों को हमेशा सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है लेकिन इनमें से ज्यादातर मामले साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते हैं। साइनस दरअसल मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो हमारे सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में मद्द करती है। श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकती है। जब व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है, जिससे साइनोसाइटिस नामक बीमारी होती है।

साइनस नाक से जुड़ी एक गंभीर समस्या हैं साइनस की बीमारी सर्दी-झुकाम से शुरू होती हैं और फिर तेजी से बैक्टीरिया , वायरल या फंगल के साथ तेजी से बढ़ती हैं ।

अगर सर्दी-झुकाम दो या तीन में ठीक हो गया तो अच्छी बात हैं मगर सर्दी-झुकाम बाहर न निकलकर अंदर ही जम गया है जोकि आगे चलकर साइनस बन सकता है। साइनस आमतौर पर एक वायरस के कारण होता है और अक्सर अन्य ऊपरी श्वसन लक्षणों के बाद भी जारी रहता है। कुछ मामलों में, बैक्टीरिया, या शायद ही कभी कवक, साइनस संक्रमण का कारण बन सकता है।

 

साइनस का लक्षण (Symptom of Sinus):-

 

  • कान, नाक और दांतों में साइनस में दबाव या दर्द  होना
  • गले में खराश
  • बुखार आना
  • चेहरे पर सुजन रहना
  • नाक में भरापन की भावना होना
  • खांसी होना या बलगम वाली खांसी निकलना
  • नाक से जल निकासी होना
  • सिर में  दर्द होना
  • नाक से कफ निकलना और बहना
  • कफ जमना

साइनस होने पर घरेलू उपाय या इलाज (Home remedies or treatments on sinus):-

  1. भाप लेने से बंद नाक खुलती हैं। साथ ही साथ यह साइनस के प्रेशर और सिरदर्द को भी कम करता हैं। यह एक अमृत की तरह काम करता हैं।
  2. साइनस की समस्या के इलाज के लिए कुल्ला भी एक अच्छा माध्यम है। 10 मिनिट तक गर्म पानी और नमक के साथ कुल्ला शुरू करने से साइनस में रहत मिलती हैं ।
  3. साइनस (Sinus) का प्राकृतिक उपाय गाय का घी है जो घर पर साइनस इलाज करने के लिए उपाय में काफी प्रभावी माना जाता है
  4. साइनस के मरीजों को धूल से काफी परेशानी हो सकती है। अपने घर का वातावरण साफ रखिये।
  5. प्याज और लहसुन की तरह तीखे खाद्य पदार्थों साइनस के इलाज में अधिक फायदेमंद साबित होते है।
  6. सेब का सिरका के सेवन से साइनस जल्दी ठीक हो जाता हैं ।
  7. तुलसी, शहद, मेथी, हल्दी और अदरक इन सब को मिलाकर इसका का सेवन करना चाहिये । इसको काढ़ा भी कहते हैं । यह साइनस रोगी के लिए बहुत ही उपयोगी हैं ।
  8. ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होती है । इसके सेवन से साइनस में होने वाली ठण्ड से राहत देता हैं ।

 

साइनस होने पर क्या नहीं खाये (Do not eat when you sinus)

  1. शराब और धूमपान का न करें सेवन
  2. ठंडे पदार्थ से बनाएं दूरी जैसे आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी, कोल्ड्रिंक, जूस इत्यदि
  3. कैफीन युक्त ड्रिंक्स, चाय-कॉफी और चॉकलेट का सेवन साइनस की बीमारी कभी नहीं सेवन करना चाहिए।
  4. बासी भोजन का सेवन न करे