चिकन पॉक्स होने पर घरेलु उपाय और इलाज

चिकन पॉक्स होने पर घरेलु उपाय और इलाज

Topic Covered-:

चेचक के लक्षण, चिकन पॉक्स होने के कारण, चिकन पॉक्स होने पर क्या खाना चाहिए, चिकन पॉक्स होने पर क्या करे, चिकन पॉक्स होने के लक्षण,चिकन पॉक्स होने पर बचाव.

चेचक एक फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। जिसके पैदा होने का मुख्य कारण वेरीसेल्ला जोस्टर नामक वायरस होता है। चेचक में  शरीर पर छाले की तरह दाने बनते हैं और उनमें खुजली (itching) होती है। चेचक ऐसे लोगों को ज्यादा होता है जो बीमार न पड़ते हों या जिन्होंने चेचक से बचने के लिए टीकाकरण न करवाया हो।

चेचक के लक्षण (Symptoms of Chickenpox)

अगर चेचक रोग हो तो प्यास ज्यादा लगती है और पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। इसमें बुखार होने के साथ शरीर का तापमान बढ़ जाता है और ह्रदय की गति भी तेज होने लगती है। चेचक वाले रोगी के पूरे शरीर पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं, उन लाल रंग के दानों में पानी जैसा मवाद पैदा हो जाता है। लगभग सात दिनों की अंदर ये दानें पकने लगते हैं और बाद में यह धीरे-धीरे करके सुख जाते हैं, जो व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त होता है, उसे बहुत ही बैचेनी होती है और उसे प्यास भी अधिक लगती है, साथ में पुरे शरीर में दर्द होने लगता है।

चेचक का सूक्ष्म विषाणु से जन्य और संक्रामक रोग होता है और रोगी के खाँसने, छींकने, बोलने से और साँस के साथ भी फैलता है. चेचक का इलाज कराने में देर नहीं करनी चाहिए.

चिकन पॉक्स होने के कारण

  1. बेरीसेला वायरस ठंड में ज्यादा सक्रिय होता है जो इस बीमारी का कारण है।
  2. जिसकी त्वचा ज्यादा संवेदनशील त्वचा होती है उसे चिकेन पॉक्स होने की ज्यादा संभावनाएं रहती है।
  3. अत्यधिक ठंड या गर्म होने से भी यह बीमारी होती है।
  4. बच्चों में मां के दूध को एकाएक छोडकर अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने से इंफेक्शन होता है।
  5. गंदा खाने या पानी का सेवन करने से या खुला खाद्य पदार्थ खाने से।

चेचक का रोग कितने प्रकार का होता है-

1 दुलारी माता या  रोमान्तिका

2 छोटी माता या शीतला माता (मसूरिका)

3 बड़ी माता (शीतला माता)

चेचक के घरेलू उपाय – Chicken Pox Treatment in Hindi

वैसे तो यह रोग बच्चो में होता है लेकिन यह जरूर नहीं की बड़े व्यक्तियों में चेचक या छोटी माता का रोग न हो ये रोग किसी को भी हो सकता है, यह किसी भी व्यक्ति के शरीर को केवल एक बार ग्रसित कर सकता है. क्योंकि शरीर में मौजूद इम्युनिटी सिस्टम या रोग प्रतिरोधक तंत्र इस रोग के वायरस से लड़ने के लिए खुद को बहुत ही मजूबत देता है. और यही कारण है यह रोग केवल एक ही बार होता है. चेचक रोग की पूरी प्रकोप अवस्था में सारे शरीर पर दाने निकल आते हैं और उनमे पानी सा भर जाता है जिस कारण ये देखने में ऐसे लगते हैं.

1. नीम

नीम में एंटीवायरल प्रॉपर्टीज होती हैं, इसलिए इसे चेचक के इलाज में काफी फायदेमंद माना जाता है। साथ ही, यह चेचक के लाल दागों को सुखोने में मदद करती है और खुजली और जलन से काफी आराम प्रदान करती है।

2. गाजर और धनिया (Carrots and Coriander)

गाजर और धनिया से बना सूप चेचक के इलाज में अत्यधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो हीलिंग प्रोसेस को बढ़ाते हैं।

3. बेकिंग सोडा (Baking Soda)

चेचक के कारण होने वाली खुजली और जलन से छुटकारा पाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक गिलास पानी में तीन चम्मच बेकिंग सोडा मिलायें। अब किसी मुलायम कपड़े को इस पानी में भिगोकर दागों पर रख दें और इसके सूखने का इन्तेजार करें। आप कपड़े की जगह रुई का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। या फिर, अपने नहाने के पानी के टब में डेढ़ कप बेकिंग सोडा लें और फिर इसमें अपने पूरे शरीर को डुबोकर रखें।

4. जीरा

100 ग्राम कच्चा धनिया और 50 ग्राम जीरा को 12 घंटों तक पानी में भीगने के लिये रख दें। फिर दोनों को पानी में अच्छी तरह से मिला लें और इस पानी को छानकर बोतल में भर लें। चेचक के रोग में बच्चे को बार-बार प्यास लगने पर यही पानी पिलाने से लाभ होता है।

5. हल्दी

10 ग्राम हल्दी, 5 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम मिश्री का बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। फिर तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर उसके साथ इस चूर्ण को रोजाना सुबह-सुबह खाने से चेचक के रोग मे लाभ होता है।

6. नारियल तेल

नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर लगाने से चेचक के दाग मिट जाते हैं।

लगभग आधा ग्राम केसर को नारियल के पानी के साथ रोजाना 2 बार रोगी को पिलाने से चेचक(शीतला) के दाने जल्दी ही और आसानी से बाहर आ जाते हैं।

चेचक में भोजन और परहेज :

चिकन पॉक्स होने पर क्या खाना चाहिए-:

रोगी को तली हुई चीजें, मिर्चमसाले वाला भोजन और ज्यादा ठंड़ी या ज्यादा गर्म चीजें नहीं देनी चाहिए।

छोटे बच्चों को चेचक (chicken pox) होने पर दूध, मूंग की दाल, रोटी और हरी सब्जियां तथा मौसमी फल खिलाने चाहिए या उनका जूस पिलाना चाहिए।

चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी में छोंका नहीं लगाना चाहिए।

 

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